पटना के स्लम और कामकाजी वर्गों ने गाँधी मैदान में मनाई बापू की 157वीं जयंती: पर्यावरण और सादगी का संदेश

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक विशेष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
आश्रय अभियान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि इसमें मुख्य रूप से पटना के मलिन बस्तियों (स्लम) की महिलाओं और कामकाजी वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
बापू की आदमकद प्रतिमा के समक्ष एकत्रित होकर, इन मेहनतकश समुदायों ने पुष्पांजलि अर्पित की और उनके विचारों पर गहरी चर्चा की। यह आयोजन इस बात का सुंदर प्रतीक था कि गांधी जी के विचार और सादगी आज भी समाज के सबसे जमीनी और वंचित तबके के जीवन से गहराई से जुड़े हुए हैं।

इस गोष्ठी का मुख्य विषय "गाँधी जी के पर्यावरण संरक्षण और संधारणीय जीवन शैली" रखा गया था।
आश्रय अभियान की निर्देशिका सह सचिव, सिस्टर डॉरोथी फर्नांडीस की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में यह बात उभर कर सामने आई कि गांधी जी केवल एक राजनीतिक नेता या स्वतंत्रता सेनानी नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी पर्यावरणविद भी थे।
भले ही उनके दौर में 'ग्लोबल वार्मिंग' या 'क्लाइमेट चेंज' जैसे आधुनिक शब्द चलन में नहीं थे, लेकिन उनकी जीवनशैली पूरी तरह से पर्यावरण संरक्षण पर आधारित थी। वक्ताओं ने बापू के उस प्रसिद्ध कथन को विशेष रूप से याद किया कि "धरती हर मनुष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त साधन प्राप्त करती है, लेकिन किसी के लालच को पूरा करने के नहीं"।

सिस्टर डॉरोथी ने स्लम और कामकाजी वर्ग से आए लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी का जीवन अपने आप में एक 'पर्यावरण मैनुअल' था और उन्होंने जो भी कहा, उसे सबसे पहले अपने जीवन में उतारा। आज जब पूरी दुनिया जलवायु संकट का सामना कर रही है, तब संयुक्त राष्ट्र (UN) के संधारणीय विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए गांधीवादी सादगी ही सबसे कारगर रास्ता दिखाई देती है।
उपस्थित वक्ताओं और बस्तियों से आए लोगों ने स्वदेशी अपनाने, सादा जीवन उच्च विचार, साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन (अपशिष्ट प्रबंधन) जैसे व्यावहारिक विषयों पर अपने अनुभव साझा किए और आज के समय में इन विचारों की प्रासंगिकता पर बात की।
कार्यक्रम में वैचारिक चर्चा के साथ-साथ एक शानदार सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिली।
बच्चों ने बापू का वेश धारण कर बड़ी प्रमुखता से अपनी बातें रखीं और बापू के प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो तेने कहिये' की सुमधुर प्रस्तुति दी गई।
आश्रय अभियान के रंगकर्मी धर्मेन्द्र कुमार और नेत्री रुक्मिणी देवी ने अपने गायन से इस अवसर को और भी खास बना दिया, वहीं सुदर्शन कुमार ने गांधी जी के 'जंतर' को लोगों के सामने रखा। दिलीप पटेल, राजेश कुमार, बबली देवी, सरस्वती देवी, प्रमिला देवी और केवल पासवान सहित कई जमीनी कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए।
यह आयोजन इस बात का प्रमाण था कि एक बेहतर और टिकाऊ भविष्य की नींव हमारे कामकाजी वर्ग की भागीदारी से ही मजबूत हो सकती है।




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