बातचीत जारी रहे: पटना नगर निगम के आयुक्त के साथ हमारी मुलाकात
सर्दी आने वाली है। इसका सबसे पहला असर उन लोगों पर पड़ता है जो फुटपाथ पर, पुल के नीचे और रेलवे स्टेशन के बाहर सोते हैं। साथ ही उन मेहनतकश लोगों पर भी, जो सड़क पर काम करके अपनी रोज़ी कमाते हैं। इन्हीं लोगों की बातें लेकर हमारी निदेशक सिस्टर डोरोथी फर्नांडिस और हमारे साथी सुदर्शन पटना नगर निगम के आयुक्त श्री यशपाल मीणा से मिले।
यह मुलाकात कम समय की सूचना पर दोपहर के आसपास हुई। हम आयुक्त महोदय के आभारी हैं कि उन्होंने हमारे लिए समय निकाला। उनकी बातें सुनकर हमें उम्मीद भी मिली है।

ठंड शुरू होने से पहले रैन बसेरे
सिस्टर डोरोथी ने सबसे पहले रैन बसेरों (रात्रि आश्रय) की ज़रूरत उठाई। हर सर्दी में बेघर लोग बिना छत के ठिठुरती रातें काटते हैं। ठंड बुज़ुर्गों, बच्चों और बीमारों के लिए जानलेवा भी हो सकती है। इसलिए रैन बसेरे ठंड बढ़ने से पहले तैयार होने चाहिए, उसके बाद नहीं।
श्री यशपाल मीणा ने भरोसा दिलाया कि पटना में रैन बसेरे बनाए जाएँगे और उनकी देखभाल नगर निगम करेगा। हम इस वादे का स्वागत करते हैं और चाहते हैं कि यह जल्द ज़मीन पर दिखे।

बस्ती के लोगों के लिए मकान
सिस्टर डोरोथी ने आयुक्त को यह भी याद दिलाया कि कम आबादी वाली एक बस्ती के परिवारों के लिए मकान बनाने की बात बाकी है। छोटी बस्तियों पर अक्सर ध्यान नहीं जाता, जबकि उनके परिवारों को भी पक्के घर की उतनी ही ज़रूरत होती है। आयुक्त ने कहा कि वे इस काम के लिए प्रतिबद्ध हैं।
पथ विक्रेता: कार्ड, कर्ज़ और कमेटी
सुदर्शन ने रेहड़ी-पटरी वालों से जुड़े तीन मुद्दे रखे। हमारे काम का बड़ा हिस्सा इन्हीं लोगों के साथ है।
वेंडर कार्ड का नवीनीकरण (रिन्युअल): कई दुकानदारों को करीब पाँच साल पहले नगर निगम से कार्ड मिले थे। उनका नवीनीकरण अब तक नहीं हुआ है। वैध कार्ड के बिना दुकानदार हमेशा डरे रहते हैं कि कहीं उन्हें हटा न दिया जाए।
ऋण (लोन): छोटा कारोबार चलाने के लिए दुकानदारों को थोड़ी पूँजी चाहिए होती है, लेकिन कर्ज़ मिलना आज भी मुश्किल है।
टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक: यह कमेटी दुकानदारों को उन फ़ैसलों में अपनी बात रखने का मौका देती है जो उन पर असर डालते हैं। इसकी बैठक बुलाई जानी चाहिए।
आयुक्त ने आश्वासन दिया कि यह बैठक पूजा की छुट्टियों के बाद होगी।
हम इस समय-सीमा को याद रखेंगे और निगम को भी याद दिलाते रहेंगे।
आगे क्या होगा
कमरे में किया गया वादा तभी काम का है जब वह फुटपाथ तक पहुँचे। आश्रय अभियान इन सभी आश्वासनों पर नज़र रखेगा: रैन बसेरे, बस्ती के मकान, वेंडर कार्ड का नवीनीकरण, ऋण और टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक। हमारे फील्ड कार्यकर्ता अभी कार्ड नवीनीकरण के लिए दुकानदारों का सर्वे कर रहे हैं और नए दुकानदारों को आश्रय अभियान दुकानदार संघ से जोड़ रहे हैं।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि बातचीत चलती रहे। बेघर लोगों और असंगठित मज़दूरों के हक़ में बदलाव तभी आता है जब ज़िम्मेदार अधिकारियों से लगातार और सम्मान के साथ बात की जाए, और प्रभावित लोगों की आवाज़ भी साथ हो।
हम यह दरवाज़ा खटखटाते रहेंगे। हमारे सभी मित्रों और समर्थकों से अनुरोध है कि वे इस सफ़र में हमारे साथ बने रहें।




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