अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर एकजुट हुए मजदूर
- TEAM AASHRAY ABHIYAAN
- May 1
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आज 1 मई 2026 को आश्रय अभियान की टीम ने बिहार के अलग-अलग इलाकों में मजदूरों के साथ "मजदूर दिवस" मनाया। इसका मुख्य उद्देश्य मजदूरों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।
सिस्टर डोरोथी फर्नांडेस के नेतृत्व में आश्रय अभियान पिछले 24 सालों से उन लोगों की आवाज़ उठा रहा है जो हमारे शहर और समाज को बनाते हैं, लेकिन अक्सर खुद अनदेखे रह जाते हैं।
1. मुन्ना चौक पर चर्चा: हक की बात
सुबह मुन्ना चौक पर मजदूरों की एक सभा हुई। कार्यक्रम की शुरुआत मजदूर गीतों से हुई, ताकि जोश और एकता का संदेश दिया जा सके।

वहाँ मुख्य रूप से इन मांगों पर बात हुई:
8 घंटे काम: मजदूरों से 8 घंटे से ज्यादा काम न कराया जाए।
उचित मजदूरी: काम के बदले सही और पूरा दाम मिले।
लेबर कोड का विरोध: सरकार जो नए 'चार लेबर कोड' (मजदूर कानून) लाई है, उन्हें वापस लिया जाए क्योंकि मजदूरों को लगता है कि ये उनके खिलाफ हैं।
सरकारी पोर्टल की समस्या: सरकार का लेबर पोर्टल बंद होने की वजह से मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मांग की गई कि इसे तुरंत चालू किया जाए।
सभा का अंत "मजदूर एकता जिंदाबाद" और "संगठित हो, जागरूक हो" के नारों के साथ हुआ।
2. मसौढ़ी लेबर चौक: हम मजबूर नहीं, मजदूर हैं
मसौढ़ी में धर्मेंद्र कुमार के नेतृत्व में एक 'नुक्कड़ सभा' हुई। यहाँ पढ़े-लिखे मजदूर साथियों (प्रमोद, संतोष और मनीष) ने बहुत जरूरी बातें बताईं:

लेबर कार्ड के फायदे: उन्होंने समझाया कि लेबर कार्ड बनवाना क्यों जरूरी है और इससे इलाज या दुर्घटना के समय कैसे मदद मिलती है।
शिक्षा पर जोर: मजदूरों को प्रेरित किया गया कि वे अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएं, ताकि आने वाली पीढ़ी का भविष्य बेहतर हो।
दमदार नारा: सभा में गूँज उठा— "हम मजदूर हैं मगर मजबूर नहीं!"
इस पूरे अभियान का सार यह है कि बिहार के असंगठित मजदूर (जैसे राजमिस्त्री, रेहड़ी वाले, खेतिहर मजदूर) अब अपने अधिकारों को लेकर चुप नहीं रहेंगे। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी समस्याओं को सुने, पोर्टल चालू करे और पुराने अधिकारों को न छीने।
आश्रय अभियान का कहना है: जब तक मजदूर जागरूक होकर एक नहीं होंगे, तब तक उन्हें उनका पूरा हक नहीं मिलेगा।



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