महिलाओं ने मनाया सावित्रीबाई फुले फ़ातिमा शेख जयंती!
- TEAM AASHRAY ABHIYAAN
- Jan 4
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03 जनवरी 2026 को, वार्ड नंबर 09 के अंतर्गत साह साहगड्डी मस्जिद स्लम में, भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारक कवयित्री सावित्रीबाई फुले जी की जयंती बड़े धूमधाम से मनाई गई।

जयंती समारोह की अध्यक्षता एमएल नेता और दीघा विधानसभा से महागठबंधन की पूर्व उम्मीदवार प्रोफेसर दिव्या गौतम ने की, और संचालन एमएल नेता और समाजसेवी जितेंद्र कुमार ने किया।
जयंती समारोह की अध्यक्षता करते हुए श्रीमती दिव्या गौतम ने कहा कि परम पूजनीय सावित्रीबाई फुले ने पूरे भारत में शिक्षा की ज्योति जलाई। 1848 में उन्होंने पुणे में भारत का पहला लड़कियों का स्कूल स्थापित किया और खुद पहली प्रधानाचार्या बनीं।
उनकी मदद उनकी करीबी दोस्त और सहकर्मी फातिमा शेख ने की, जिन्होंने फुले दंपति को बहिष्कार का सामना करने पर आश्रय दिया और स्कूल में साथ पढ़ाया, और भारत की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका बनीं। साथ में, उन्होंने कड़ी सामाजिक विरोध का सामना करते हुए हाशिए पर पड़े समुदायों की लड़कियों को पढ़ाया, जिसमें दलित और निचली जातियां शामिल थीं, और महिलाओं के सशक्तिकरण तथा सामाजिक सुधार की नींव रखी। उन्होंने विधवा पुनर्विवाह का समर्थन किया और बाल विवाह तथा छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाई।

उन्होंने अनाथों और विधवाओं के लिए आश्रय गृह चलाए। सत्य शोधक समाज नामक संगठन के बैनर तले उन्होंने सामाजिक समानता पर जोर दिया। शिक्षा और समानता के लिए उनका जीवन आज भी प्रेरणा का स्रोत है। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सावित्रीबाई फुले द्वारा दिखाए गए रास्ते का अनुसरण सभी को अपने सच्चे मन, आत्मा और भावना से करना चाहिए।

आगे दिव्या गौतम ने कहा कि इस कड़ाके की ठंड के मौसम में सरकार द्वारा चलाई जा रही बुलडोजर नीति अमानवीय है, और उन्होंने सभी स्लमवासियों से अपने अधिकारों के लिए एकजुट रहने की अपील की। जयंती समारोह की पूरी व्यवस्था आश्रय अभियान की नेता रुकमिणी देवी, आश्रय अभियान के सदस्य दिलीप कुमार उर्फ दिलीप पटेल और सरस्वती देवी ने की।
जयंती समारोह को वार्ड नंबर 09 के पार्षद आशीष कुमार शंकर, दिलीप पटेल, रुकमिणी देवी, सरस्वती देवी, रंजू देवी, रतन देवी, मकसूदन पासवान, शत्रुधन प्रसाद, बल्लू पासवान सहित कई लोगों ने संबोधित किया।




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