दैनिक कार्य रिपोर्ट
प्रस्तुतकर्ता: रंजीत कुमार दिनांक: 04.05.2026 एवं 05.05.2026
04 मई 2026: बेऊर लेबर चौक एवं गर्दनीबाग क्षेत्र

1. लेबर कार्ड पंजीकरण की स्थिति:
बेऊर लेबर चौक पर श्रमिकों से मुलाकात हुई। संबोधि पासवान और राजकुमार मिस्त्री का लेबर कार्ड फॉर्म भरा जा चुका है, लेकिन पोर्टल बंद होने के कारण आवेदन पूरा नहीं हो सका।
श्रमिकों की शंका दूर करने के लिए फुलवारी शरीफ के लेबर इंस्पेक्टर से फोन पर उनकी बात कराई गई। इंस्पेक्टर के आश्वासन के बाद श्रमिकों में विश्वास जगा।
श्रमिक युगल किशोर यादव, नीतीश कुमार और विक्रम ने बताया कि उन्होंने 6 महीने पहले कार्ड के लिए दस्तावेज दिए थे, पर अब तक कार्ड नहीं बना। जाँच करने पर पता चला कि उनका फिंगरप्रिंट (biometric) और OTP सत्यापन नहीं हुआ था, केवल आधार कार्ड और फोटो लिए गए थे। उन्हें समझाया गया कि पोर्टल खुलने पर नए सिरे से आवेदन करना होगा।
2. अन्य मुलाकातें:
60 वर्षीय किशोरी नामक श्रमिक ने भी कार्ड बनवाने की इच्छा जताई। उन्हें पात्रता संबंधी जानकारी दी गई।
3. गर्दनीबाग (21 नंबर) का दौरा:
यहाँ रह रहे लोगों ने अपनी दयनीय स्थिति साझा की। आवास की समस्या के कारण लोग सड़क पर रहने को मजबूर हैं। उन्होंने अत्यंत निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी स्थिति "नाली के कीड़ों से भी बदतर" हो गई है।
उन्हें संगठित होने और अपने हक के लिए आवाज उठाने हेतु प्रेरित किया गया। उन्हें बच्चों के भविष्य का हवाला देकर एकजुट होने का सुझाव दिया गया।
05 मई 2026: जय प्रकाश नगर, सिपारा लेबर चौक

1. श्रमिकों की समस्याएँ:
सिपारा लेबर चौक पर ग्रामीण क्षेत्रों से आए श्रमिकों से संवाद हुआ। ये मजदूर बेरोजगारी और महंगाई के कारण काम की तलाश में भटकने को मजबूर हैं।
दिलीप पासवान (पुनपुन): बेटी की शादी के खर्च के लिए काम की तलाश में पटना आए हैं।
हरि मांझी एवं राम प्रवेश (मधुवन): इन्होंने बताया कि गाँवों में काम की कमी है और यदि काम मिलता भी है, तो मजदूरी समय पर नहीं मिलती। मजबूरी में वे पटना आते हैं, जहाँ सप्ताह में मुश्किल से 2-3 दिन ही काम मिल पाता है।

2. रंजीत कुमार द्वारा दिए गए सुझाव: श्रमिकों की समस्याओं को सुनने के बाद उन्हें तीन मुख्य समाधान सुझाए गए:
स्वरोजगार: आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए छोटा ही सही, पर अपना कोई काम शुरू करने का प्रयास करें।
दस्तावेजीकरण: लेबर कार्ड के लाभों हेतु सभी जरूरी कागजात तैयार रखें।
जागरूकता: समय-समय पर आयोजित होने वाली बैठकों में शामिल हों ताकि अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें।




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